Sunday, November 9, 2008

वारंट

जज साहब यह कैसी परम्परा है की अदालत में केस दर्ज हो जाता है और मुद्दालय को पता भी नही चल पता की उन पर केस दर्ज है। पता तब होता जब थानेदार साहब वॉरंट लेकर एकाएक उनके घर पहूँचते हैं।
कोर्ट में सिस्टम बना हुआ है की पहले सम्मन जाएगा और सम्मन का जवाब नही मिलने या उपस्थित नही होने पर हीं वॉरंट जारी किया जाएगा किंतु इस परम्परा को या तो कोर्ट के पेशकार बाबु दबा देते हैं या फिर सम्मन पहूँचाने वाले डाकिये बाबु।
दूसरा माननिये न्यायालय में डेट पर डेट लेने में भी व्यापक रूप से धांधली है। अगर आप चौकस नही रहे तो पुनः वॉरंट का सिकार बनना तय है। डेट की जानकारी के लिए आपको या तो वकील साहब को पैसे देने होंगें या फिर पेशकार बाबु को।
माननिये चीफ न्याधीश, भारत सरकार को अपने ब्लॉग के माध्यम से इन छोटी-छोटी त्रुटियों पर ध्यान दिलाना चाहता हूँ ताकी आम जनता को परेशानी न उठाना पड़े । कोई येसा तरकीब निकालें की वॉरंट और सम्मन के बीच सीधा संपर्क स्थापीत मुद्दई को न्यायलय से हो जाए और थानेदार बाबु का हिस्सा गौण हो जाए।

Friday, November 7, 2008

बिहार को केन्द्र शासित प्रदेश घोषित कर देना चाहिए

बिहार को लेकर पुरे देश के साथ-साथ विश्व भी चिंतित है। आए दिन कभी बिहार-महाराष्ट्र तो कभी यु पी - बिहार तो कभी बंगाल-बिहार की चर्चा देश-विदेश के चैनलों और पत्र-पत्रिका में देखने को अक्सर मिल ही जाती है। मतलब साफ है की बिहार के पास अपना उधोग-धंधा नही होने से, दूसरा की बिहार झारखण्ड बटवारे से शेष बिहार के पास बाढ़ से ज्यादा प्रभाभित इलाका ही रह गया है जिस वजह से श्रमिक वर्ग , किसान वर्ग, मझोले वर्ग आदि देश के कोने-कोने में जाकर अपना रोजी-रोटी तलाशते है। रोजी-रोटी तलाशना कोई जुर्म की बात नही फिर भी बिहार से लोगों को नफरत सा पैदा हो गया है।
जबकी बिहार के लोग काफी परिश्रमी, सब्मिसिब और लचीले होते है। बिहार के लोग हमेशा अपने कर्मो पर विश्वास करते है। शिक्षा के क्षेत्र में भी काफी अब्बल होते हैं परन्तु जीवीका के लिए इन्हें रोजगार तो चाहिए और रोजगार के तलाश में विश्व के किसी भी क्षेत्र में जाने को अक्सर तत्पर होते हैं।
यह दुर्भाग्य है की बिहार में डॉ राजेंद्र प्रसाद यवमलोक नायक जयप्रकाश के पद चिन्हों पर चलने वाले नेता आज के दौड़ में एक भी नही है जबकी लालू , नीतिश, सुशिल आदि दावा करते हैं की लोकनायक के अनुनाई है पर वास्तव में ये लोग दपोद्शंखी है। आज के दौर में ये लोग बिहार को बेच रहे है और ख़ुद माल बटोर रहे हैं। आज लालू जी कह रहे की पूर्वांचल राज्य घोषित करो जिसकी राजधानी वाराणसी हो। लालू सही में देश के दुश्मन है। जो पहले बिहार को खंडित किया अब वो यु-पी -बिहार और अन्य को बिखंडित करना चाहते है।
मैं व्यक्तिगत तौर पर केन्द्र सरकार से मांग करता हूँ की - बिहार को केन्द्र शासित प्रदेश घोषित कर देना चाहिए चुकी बिहार एक अति पिछड़ा इलाका हो गया है इन दपोर्शंखी नेता से। बिहार के नेता बिहार के लोगों का हक़ अपने जेब में अब रखने लग गए हैं। शेष बिहार में न तो उधोग ज्यादा है और न खनीज अगर कुछ है तो वह है बाढ़ । यैसे में केन्द्र सरकार को अतिशीघ्र बिहार को केन्द्र शासित प्रदेश घोषित कर देना चाहिए ।

Wednesday, November 5, 2008

ओबामा की तरह बिहार में भी सत्ता परिवर्तन की जरूरत

आज़ादी के ६२ वसंत देख चुके बिहार के नवयुवक, प्रोढा, बुजुर्ग यवम महिला। किंतु आज भी इनके मानसिकता से गुलामी नही गई। ये आज भी गुलाम बनकर जीने को मजबूर हैं। बिहार में साक्षरता ३४ % से ज्यादा बढ़ नही सकी। बुध्धिजीवी वर्ग बिहार से पलायन करते रहे और लुटेरा, गुंडा, मबाली, उचक्के आदि सत्ता का भोग भोगते रहे।
बिहार में आज तक जितने भी मुख्यमंत्री बने वो या तो जातिगत आधार पर वोट की राजनीत कर आगे बढे हैं या फिर गुंडा, मबाली, उचक्के आदि के बल पे। बिहार में साक्षरता के कमी रहने से यंहां की जनता बेबस रहती है। यही वो वजह है की बिहार में लालू जैसे लुटेरा २० वर्षों तक राज्य-पाट कर बिहार को गर्त में मिला कर रख दिया। इनसे त्रस्त होकर बिहार की जनता नीतिश को मुख्यमंत्री पदपर बिठा दिया। किंतु जनता की जो उम्मीद थी की नीतिश सरकार बिहार के लिए कुछ करेंगें वो व्यर्थ साबित हो रहा है। अब ये ये कहकर अपना पल्ला झाररहे की २० वर्ष तक लालू को आप झेल लिए तो नही अभी तो मुझे २-३ वर्ष भी नही हुए कुर्सी संभाले ।
मैं बिहार की जनता खासकर युवा से आह्वान करना चाहता हूँ की बिहार का बागडोर ओबामा जैसे उर्जावान व्यक्ति के हाथों में दे ताकी बिहार का विकाश का मार्ग प्रसस्त हो सके।
जो भी भाई बंधू बिहार से बाहर रह रहें है वो भी किसी भी माध्यम से बिहार की तरक्की, खुशहाली के लिए सत्ता का परिवर्तन ओबामा जैसे व्यक्तित्व के हांथो में देने का प्रयास करे।
घिसे -पिटे नेता से बिहार का तरक्की नही होनेवाला है। अगर यही घिसे-पिटे नेता बिहार के गद्दी पर बिराजमान रहे तो कई राहुल राज जैसे नवयुवक मौत के घाट उतर दिए जायेंगे और हम-आप अंशु बहने के सिवा कुछ भी नही कर पायेंगें ।
प्यारे बिहार बासियों यही वह वक्त है प्रेरणा लेने की - जब व्हाइट हाउस में अश्वेत ओबामा को लोग चुन सकते हैं तो आप क्यों नही नए उर्जावान नेता का चयन कर सकते। आइये हम-आप सभी मिलकर एक यैसे उर्जावान को चुने जो बिहार की तस्वीर बदल दे ।

Tuesday, November 4, 2008

ओबामा को बधाई

ओबामा की जीत पुरी दुनियां की जीत है। ओबामा की जीत पर पुरे दुनियां के सामंतवादी उन्हें बधाई दे रहें हैं। साथ में उनसे यह भी अपेक्षा कर रहे हैं की सामंतवादी के लिए ओबामा कहाँ तक उपयुक्त होंगें।
मेरे समझ से ओबामा की जीत पारदर्शिता की जीत है। सामंतवादी, पूंजीवादी, उधोग्वादी आदि को भी पुरे विश्व समाज के सामने ओबामा जैसे राष्ट्रपति को पारदर्शिता के लिए उत्साहित करना चाहिए।
मैं व्यक्तिगत रूप से और भारत के किसान भाई, श्रमिक वर्ग, मध्यम वर्ग आदि की ओर से महामहिम ओबामा को उनके कर्मठता, योग्यता, पारदर्शिता, और पक्का इरादा के लिए बधाई देता हूँ और उम्मीद करता हूँ की विश्व बाज़ार से काले धन, भ्रष्टाचार को खत्म कराने में हर मजहब , धर्म के लोग ओबामा का साथ दे और ओबामा भी ।

नेता, प्रशाशन और पत्रकार ये तीनो हैं भारतीये नागरिक के जीवन शैली

भारत में नेता, प्रशाशन और पत्रकार ये तीनो मिलकर भारतीये जीवन शैली की रूप रेखा तैयार करते आए हैं। अगर ये लोग आपस में सामंजस बना लें तो देश में भ्रष्टाचार स्वाभाविक रूप से बढ़ जायेगी और आज यही देखने को मिल भी रहा है।
भारतीये संबिधान में नेता के लिए कोई योग्यता नही है। अगर योग्यता है तो कैश, फ़ोन, फैक्स और मोबाइल का। इसमे अगर ४-५ वॉरंट हो तो और भी अच्छा। बुध्धिजीवी वर्ग सामान्यतः नौकरी पेशा के लिए प्रयासरत हैं। इन्हें भारतीये राजनीत में सिर्फ़ डिबेट हीं पसंद है। इन्हें हमेशा डर सा बना रहता है की राजनीत में जरा उल्टा-पुल्टा बोल दिया तो कलम (नौकरी ) पर आफत आ जायेगी। इस वजह से ये लोग संसद का मार्ग अपनाने से हिचकते है। किसान भाई है तो ये साडी जिंदगी कभी मौसम के मार से दबे रहते है तो कभी प्रकृति की भूचाल से। मध्यम वर्गीय लोग परिवार को सहेजने और सँभालने में ही अपनी जिंदगी को गवां देते है। मजदूर वर्ग रोजी-रोटी की खातिर गुलामी में ही आना जीवन न्योछावर कर देते है।
शेष बचे बुध्धिजीवी वर्ग अपने पेशे से पेशेवर हो जाते हैं । जैसे डॉक्टर, इंजिनियर, वकील व पत्रकार । ये लोग अपने पेशे में इतना पेशेवर है की भारतीये नागरिकों की जीवन शैली की परवाह तक नही करते।
मैं सिर्फ़ इतना ही कहना चाहता हूँ की आम अवाम को अब जागरूक होना होगा तभी भारतीये सभ्यता और संस्कृति की पहचान बन पायेगी और आम अवाम सुख-चैन की नींद सो सकेगा अन्यथा ये तीनो मिलकर भारतीये मूल के लोग को सरे आम बेच देंगे।

लालू से बिहारी युवक को सवाल पूछना होगा

बिहार के काले इतिहास में अगर लालू का नाम लिखा जाए तो बिहारी युवकों को कोई अतिशयोक्ति नही होगी। लालू ने बिहार को विकाश के जगह विनाश के कगार पर ला खरा कर केन्द्र की राजनीत में कूद परे । लालू ने पुरे २० वर्षों का राज किया किंतु २० उधोग नही लगवा पाए । २० वर्ष के शाशन में बिहार को तोरकर झारखण्ड बना डाला । २० वर्षों में ९५० करोर का चारा घोटाला कर ममता कुलकर्णी को डांस करवा डाला। २० वर्षों में जातिवाद ला खरा कर दिया । २० वर्षों में बिहार में गुंडागर्दी का तांडव हुआ । २० वर्षों में बिहार की सड़कों को गड्ढे में परिवर्तन कर डाला। २० वर्षों में शिक्षा को नाश में मिला डाला ।
बिहार के युवकों को यह सवाल पूछना पड़ेगा की लालू तुमने २० वर्ष के शाशन काल में कौन -कौन सा काम किया जिससे बिहार का विकाश हुआ हो ।
आज महाराष्ट्र में जो हो रहा है वो तो ग़लत है किंतु लालू जैसे बिहारी नेता क्या बिहार में बिहारी युवकों को नौकरी दे सकता है । क्या बिहार में उधोग लगवा सकता है । जवाब में बिहारी युवकों को यही मिलेगा की ये लोग सिर्फ अपने परिवार के लिए राजगद्दी पर है बिहारी जनता के लिए नही।
बिहारी जनता को तो लालू जैसे नेता गुमराह कर रहे हैं। इन्हें बिहार की जनता का कोई भी ख्याल नही है।
प्यारे बिहार के वासियों आप लोग आगे आओ और लालू जैसे तमाम नेता से पूछो की ये लोग गद्दी पर क्यों बैठे है क्यों नही इन्हें वंहा भेज दिया जाए जहाँ से ये धरती पर आयें हैं ।
राहुल राज का उत्तर इन बिहार के गद्दार नेता से पूछो की आखिर कौन सी वजह थी की राहुल राज को नौकरी तलाशने महाराष्ट्र जाना पडा ।
महाराष्ट्र के लोगों को गाली देने से हम बिहारी बहुत पीछे हो जायेंगे । हम बिहार और महाराष्ट्र के लड़ाई में ulajh कर रह जायेंगे ।

Wednesday, October 1, 2008

क्या छठ करने लालूजी जायेंगें मुंबई

दुर्गा पूजा समाप्त होते ही छठ वरतकी तैयारी शुरू हो जाती है । लालूजी और राबरी देवी भी छठ की तैयारी में लग जाते है। पिछले दिनों लालूजी बिहार और महाराष्ट्र की जनता से वादा किया था की अगली वारछठ पूजा मुंबई में करेंगे । दोनों राज्य की जनता लालूजी से जानना चाहती है की राजनीती में वादाखिलाफी जैसे नेता करते हैं वैसे ही लालूजी छठ व्रत के नाम पर भी राजनीती करेंगे या सच में राज ठाकरे के कलेजेपर मुंग दल ने मुंबई जायेंगे ।