Monday, February 28, 2011
इंतज़ार कब तक
आखिरकार क्या हुआ परिणाम रूपम पाठक हत्या कांड के जांच-परताल का ? पूरा देश इन्तेजार कर रहा है तार्किक परिणाम का| बिहार के मुख्य मंत्रीजी ने आनन्-फानन में इस राजनितिक हत्या कांड के अनुसन्धान की घोषणा तो कर, पर इसका जाँच परिणाम कब तक लोगो के बीच आएगा यह अपने-आप में एक पहेली बन चूका है| न जाने इस तरह के जांच परताल की घोषणा अनेकों बार बिहार और बिहार के बाहर देखने को मिला है। मिसाल के तौर पर आरुशी हत्या कांड आज तक पहेली बनी हुई है।
Thursday, January 6, 2011
पूर्णिया की रूपम बनी दुर्गा की अवतार
दिल्ली की जनता असंबैधानिक रूप से पूर्णिया के रूपम को देवी दुर्गा का अवतार कहने से कतरा नहीं रहे। कारण पूछने पर की हत्यारण को दुर्गा का अवतार क्यों कहा जाने लगा तो जवाब था - जब प्रशासन असहाय हो, न्यायिक व्यवस्था में असंतोष हो, विधायिका व्यवस्था अपराधिक गतिविधियों में लिप्त हो और मीडिया अँधा व विकाव बन जाये तो वंहा रूपम का जन्म लेना ही दुर्गा का अवतार है।
मतलब साफ़ है की दिल्ली की जनता इसे एक अपराध के रूप में नहीं ले रही इसके मूल वजह जनता भी अपने को असुरक्षित महसूस करने लगी है। दिल्ली के अख़बार ने तो ६ कोलुम का न्यूज़ बनाया की " दर्जनों विधायकों की जान पर मंडरा रहा खतरा" बॉक्स में "विधायकों की बढाई गई सुरक्षा" । अगर मीडिया का यही रुख होगा तो जनता कंहा सुरक्षित ? आज भारत का प्रत्येक नागरिक चाहे वह महिला हो या पुरूष सभी असुरक्षित है । इनकी सुरक्षा कौन देगा।
सुरक्षा को लेकर वाद-विबाद होता आया है इसी क्रम में बिहार की भूतपूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने एक तात्कालिक पुरूष विधायक/संसद को खुले शब्दों में तात्कालिक व वर्तमान मुख्यमंत्री का "साला" कहा था। क्या राबड़ी की ये आवाज महिलाओं को जागरूक करने के लिए था या विधायक व सांसदों के लिए अलार्म ।
बिहार सरकार की विफलताओं पर यह हत्या प्रश्नवाचक है? इसकी जांच सीधे-सीधे सी बी आई से करानी चाहिए।
अक्सर देखा गया है की मुख्यमंत्री जांच का आदेश दे देते और परिणाम नदारत। बिहार में ही एक मंत्री के घर उसके बेटे-पतोह को गोली मारकर हत्या कर दी गई थी मुख्यमंत्री ने जांच के आदेश दे डाले थे पर आज तक उस हत्या का राज जनता के समक्ष नहीं आ सका। विधायकों और सांसदों के चाल-चरित्र पर भी मीडिया को नज़र रखनी पड़ेगी तभी पारदर्शी मीडिया हो पायेगी। बिहार के अन्दर कई ऐसे ऍम एल सी बने है जो हाई प्रोफाइल को कई तरह के उपहार भेंट करते आये है। लोगो को इन हाई प्रोफाइल वाले नेता के आगे-पीछे घुमने वाले आदमियों पर भी मीडिया को पैनी नज़र डालने की जरूरत है और जाँच अधिकारी को भी तभी सामने कुछ तथ्य सामने आ पायेगा वरना आरूषी हत्या कांड की तरह जांच फाइल में सिमट कर रह जाएगी।
Sunday, January 2, 2011
Thursday, November 4, 2010
केंद्र की सहायता बिना बिहार का विकाश बेईमानी
इतिहास गवाह है की कोई भी राज्य बिना केंद्र की सहायता से विकाश नहीं किया चाहे वह महाराष्ट्र, गुजरात, आंध्र प्रदेस या पंजाब हो।बिहार में भले ही नितीश की सरकार क्यूँ न हों।नितीश की सरकार ने जरूर कुछ अच्छा काम किया पर केंद्र ने भी बिहार को कम नहीं दिया। नितीश अपने ५ वर्षों के कार्य-काल में अपराध पर कामयाबी पाई है पर विकाश के लिए जो साधन-संसाधन चाहिए वो बिहार के पास नहीं।
बिहार सरकार अपने आय के क्ष्रोत को बढ़ाने में विफल है जिस वजह से केंद्र द्वारा जो भी पैसा आता है उसे खर्च करने में असमर्थ रहता केंद्र सरकार ने आई आई टी बिहार को दिया पर बच्चे जब इस संस्था से पढ़ कर निकलेंगे तो फल देने किसी दुसरे राज्य में चले जायेंगे। जबकि बीज बिहार सरकार का और फल किसी दुसरे राज्य को। नितीश सरकार ने आर्यभट्ट तकनीक संस्था विश्वविधालय तो बना दिया पर बच्चे इस तकनीक को दुसरे राज्य में इस्तेमाल करेंगे। क्योंकि बिहार में कोई उद्योग नहीं, कल-कारखाने नहीं तो फिर इन बच्चों को रोजगार कौन देगा।
बिहार के अधिकांश लोग किसान है उन्हें बिजली-पानी चाहिए उन्हें फसल की सुरक्षा चाहिए उन्हें उन्नत किस्मों की बीज चाहिए, उन्हें रियायती दरों पर खाद्ध पदार्थ चाहिए, उनके फसलों के उचित दाम चाहिए और ये सब देने के लिए किसी भी राज्य को बिना केंद्र की सहायता लिए संभव नहीं। चाहे वह नितीश की सरकार हों या लालू-पासवान की सरकार हों।
बिहार का विकाश तभी संभव है जब राज्य और केंद्र में एक ही दल का सरकार हों। बिहार की जनता को जात-पात और पार्टी से अलग हटकर विकाश के मुद्दों पर लड़ाई करनी पड़ेगी। ५ वर्षों का समय अगर बहुत ज्यादा नहीं तो बहुत कम भी नहीं विकाश के लिए। अगर कोई सरकार सिर्फ ये कहे की हमने ५ वर्षों में अपराध मुक्त कर दिया तो बहादुरी नहीं।
बिहार की जनता सोंचे-समझे सिर्फ नितीश, लालू-पासवान या राहुल चालीसा पढने से काम नहीं चलेगा। ऐसा संयोग बनाना होगा की एक ही पार्टी की सरकार राज्य और केंद्र में हों।
बिहार अभी चुनाव के दौड़ से गुजर रहा है नितीश भी चिल्ला रहे की उन्हें ५ वर्ष और मिले। उधर राहुल भी चिल्ला रहे की अगर बिहार में विकाश हुआ है तो बिहार के लोग दुसरे राज्यों में क्यों पलायन कर रहे। राहुल यह भी कह रहे की केंद्र का पैसा गरीबों तक न तो पहुँच रहा और न ही विकाश के कार्यों में लगाया जा रहा । इस तरीके से तमाम आरोप-प्रत्यारोप का दौड़ चल रहा। सही क्या है और गलत क्या है ये तो बिहार की जनता ही फैसला करेगी। आगामी २४ नवम्बर को परिणाम सामने होंगे।
तब तक आइये हम सब मिलकर दिवाली का आनंद ले। आप सभी ब्लोग्र्रों को दिवाली की ढेर साड़ी शुभकामनायें .
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