Showing posts with label जागो. Show all posts
Showing posts with label जागो. Show all posts

Wednesday, December 17, 2008

बिहार के विकाश में युवाओं की भागीदारी महत्वपूर्ण

बिहार-बिहार-बिहार हल्ला हो रहा है, लोग चर्चा - परिचर्चा कर रहे हैं फिर भी बिहार का विकाश नही हो पा रहा हैआख़िर क्यों? जबकि बिहार से ५४ प्रतिनिधि संसद में बैठकर भारत का इतिहास-भूगोल बनाते - बिगारते रहते आए हैं तो बिहार को विकाश का मार्ग प्रसस्त करने में ऐसा कौन सा रोग इन प्रतिनिधियों को लग जाता है जिससे विकाश अवरूद्ध होता है
बिहार की धरती गौतम बुध्ध, भगवान महावीर जैसे बौध्धिक विचार धारावाले को जन्म देकर पुरे विश्व में शिक्षा का संचार पैदा कर सकते हैं, गाँधी बिहार की धरती से आन्दोलन शुरू कर भारत को आज़ादी दिला सकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं तो आज बिहार को ऐसा क्या हो गया जिससे बिहार पीछे है अन्य राज्यों के तुलना मेंमुझे ऐसा लगता है की बिहार में अच्छे नेताओं की किल्लत हैजबकि बिहार के युवाओं में आज भी एक नया जोश है जो प्रतिस्पर्धा के बाज़ार में संघ लोक सेवा आयोग में बैठकर अव्वल होतेइसके अलावे देश के शीर्ष शैक्षणिक प्रतिष्ठानों में भी अपना नाम दर्ज कराने में अव्वल रहते हैं
आज के नेताओं को इन बिहारी युवाओं से प्रेरणा ले कर बिहार के विकाश में हाँथ बढ़ाना चाहिएया फिर बिहार के चौमुखी विकाश के लिए युवाओं को बिहार की राजनीत में कूदकर बिहार का बागडोर अपने हाँथ में लेना होगा तभी बिहार की तर्रक्की, बिहार का उत्थान आदि सम्भव हो पायेगा

Wednesday, November 12, 2008

आतंकवाद

आतंकवाद सुनते-सुनते लोग थक चुके हैं। अब लोगो के दील-दीमागपर आतंकवाद मानो एक अन्कुरेब्ल बीमारी सा बन गया है जिसका इलाज न तो सरकार के पास है, न तो जनता के पास और न ही शिक्षक के पास। अगर इसका इलाज कुछ है तो वह है "प्रलय" ।
मैं जब छोटा था तो अपने घर में ज्यादा शरारत किया करता था मेरे शरारत से घर के लोग अक्सर कह दिया करते थे की तुम बहुत आतंक मचा रखे हो। पहले के ज़माने में आतंक से मतलब था दूसरों को कष्ट देना। आज इस विश्वीकरण के दौड़ में आतंकवाद का मतलब है "आजादी" ।
आजादी के लिए आतंक की जरुरत नही होती बल्कि युद्ध करना होता है। और युद्ध के लिए व्यापक स्तरपर एक ठोस नीति, युद्ध सामग्री व सैनिक की आवस्यकता होती है जो इन आतंकवादियों के पास नही होती। ये आज भी वही काम कर रहे हैं जो बचपन में अपने घर और मुहल्लों में किया करते थे। इन आतंकवादियों का मकसद मेरे समझ से दुसरे को कष्ट पहुचना मात्र है । अगर इन आतंकवादियों में दम होता या इनके मां ने बचपन में दूध पिलाया होता तो ये आम लोगों को कष्ट नही पहुचाते। ये आतंवादी सही में हिजरे हैं जो चुके से कहीं पर बम बिस्फोट कराकर आम जनजीवन को तबाह कर रहे है और नेता के आगोश में फल-फूल रहे हैं।
इस आतंकवाद का सामना हिंदुस्तान का एक-एक आदमी, एक-एक बच्चा, एक-एक महिलाएं खुलकर बिरोध करें तो इन हिजरे आतंकवादियों का खत्म तय है। अगर हम-आप सरकार के स्तर से खत्म की बात करेंगें तो सायद कभी भी ख़त्म नही होगा अगर होगा तो वह केवल "प्रलय" से.