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Sunday, October 3, 2010

लाइव कॉमनवेल्थ गेम्स २०१०

भारतीये यवम देश-विदेश के इतिहास में ३ अक्टूबर २०१० का दिन स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जायेगा। आज का लाइव कॉमनवेल्थ गेम्स में भारतीये इलेक्ट्रोनिक मीडिया सबसे पीछे दिखी जबकि भारतीय दूरसंचार नेशनल चैनल ने भारतीये समय के अनुसार ठीक शाम ७ बजे से सीधा प्रशारण दिखाने में सफल हो गए। मैं यंहा कहना चाहूँगा की सारे चैनल जो यह दावा करते है की लाइव दिखा रहे है उनका दावा आज बिलकुल व्यर्थ है और खोखला। मुझे पता नहीं की बाहरी इलेक्ट्रोनिक मीडिया मेरा मतलब है एनडीटीवी , स्टार न्यूज़ , जी न्यूज़, आज तक, आईबीएन -७ , आदी को लाइव न्यूज़ दिखाने की इजाजत थी या नहीं अगर थी भी तो ये विज्ञापन से कमाने में मशगुल थे। पर ये सब के सब भारतीये समय पर देश की जनता को लाइव दिखाने में असमर्थ थे। खैर छोड़िए !
कॉमनवेल्थ गेम्स का शुभारम्भ अपने निर्धारित भारतीये समय के अनुसार ठीक ७ बजे आतिशबाजी ढोल-ताशे, मृदंग, गाजे - बाजे, नगारे, तबले आदि के साथ आरम्भ हुआ। तबले पर नन्हा कलाकार केशव अपने हांथो का कमाल दिखा रहे थे लोग उनके वादन पर आनंदित व मुग्ध हो रहे थे जैसे ही गाजे-बाजे का कार्यक्रम ख़त्म हुआ देश-विदेश से आये मेहमान ने अपने-अपने ध्वज के साथ नेहरु स्टेडियम का फूट मार्च किया। फूट मार्च भी देखने के लायक था। खिलाडी अपने-अपने अंदाज़ में दर्शकों को रिझाने में लगे थे। एक-एक करके सभी देशों ने अपने ही अंदाज़ में फूट मार्च कर रहे थे। करोड़ों रुपये की लागत से बनी गुब्बारे भी दर्शकों को लुभाने में लगी थी वंही स्टेडियम का साज-सज्जा और रोशनी भी दर्शको को चका-चौंध कर रही थी। वाकई स्टेडियम का नज़ारा स्वर्ग से कम नहीं था जिसकी हम-आप कल्पना करते है की -"स्वर्ग कैसा होगा" ?
६० हज़ार दर्शको से भरा नेहरु स्टेडियम रंग-बिरंगे पोशाकों में कुछ-न-कुछ बयां ही कर रहे थे। जब भारतीये खिलाडियों का फूट मार्च का समय आया तो सारा स्टेडियम गूंज उठा। सभी ने बड़े उत्साह के साथ भारतीये खिलाडियों का जोरदार स्वागत किया। भारत के राष्ट्रपति , प्रधानमन्त्री , खेलमंत्री, दिल्ली प्रदेश के मुख्यमंत्री ने भी भारतीय खिलाडियों का स्वागत करने से पीछे नहीं दिखे। फूट मार्च के बाद भाषण बाजी का दौड़ चला जिसे सर्वप्रथम श्री श्री श्री कलमाड़ी ने शुरू किया। कुल मिलाकर कॉमनवेल्थ गेम्स का नज़ारा बेहद ख़ूबसूरत और स्वर्ग से कम नहीं था। शेष तो आप कंही-न-कंही देर-सबेर से यह नज़ारा देख ही लेंगे । यह लेख लिखने का अभिप्रायः मेरा यह है की लाइव देखने का आनंद ही कुछ और है। अगर आप चैनलों के माध्यम से देख रहे होंगे तो आप खेल कम विज्ञापन का आनंद ज्यादा ले रहे होंगे। चलिए तमाम उहा-पोह के बाद भी समय पर कॉमनवेल्थ गेम्स आरम्भ हो गया इसकी ख़ुशी हमसबों को है। अगर आपको मौका मिले तो जरूर ३ अक्टूबर से 13 अक्टूबर के बीच खेल को यवम दिल्ली को अवश्य देखे ।